जब एक देश का सबसे ताकतवर इंसान कैमरे के सामने अचानक उठकर खड़ा हो जाए और कहे कि अब बहुत हो चुका, तो समझ जाइए कि बात हाथ से निकल चुकी है। साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के ठीक पहले वाइट हाउस में ऐसा ही कुछ हुआ था। डोनाल्ड ट्रंप टीवी इतिहास के सबसे मशहूर शो '60 मिनट्स' की एंकर लेस्ली स्टाल के सामने बैठे थे। इंटरव्यू शांति से शुरू हुआ पर देखते ही देखते यह एक तीखी बहस में बदल गया। जब स्टाल ने ट्रंप से उनके दावों पर सीधे सबूत मांग लिए, तो ट्रंप भड़क गए। उन्होंने बातचीत को बीच में ही खत्म किया और वहां से चले गए।
यह केवल एक नेता का गुस्सा नहीं था। यह मीडिया की भूमिका और सत्ता के टकराव की एक ऐसी कहानी है जिसे आज भी राजनीति और पत्रकारिता के छात्र समझने की कोशिश करते हैं।
जब लेस्ली स्टाल ने पूछे वो तीखे सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए '60 मिनट्स' का इंटरव्यू देना हमेशा से एक परंपरा रही है। चुनाव के ठीक पहले होने वाले इन इंटरव्यूज को पूरा देश देखता है। लेस्ली स्टाल कोई नौसिखिया पत्रकार नहीं थीं। वे दशकों से वाइट हाउस और दुनिया के बड़े नेताओं को कवर कर रही थीं। उन्होंने ट्रंप से सीधे कोरोना वायरस महामारी, देश की अर्थव्यवस्था और रैलियों में बिना मास्क के आ रही भीड़ पर सवाल दागने शुरू किए।
ट्रंप अपनी उपलब्धियां गिना रहे थे। वे कह रहे थे कि उन्होंने देश के लिए ऐतिहासिक काम किया है। बात तब बिगड़ी जब चुनाव में धांधली और विरोधियों की जासूसी के दावों का जिक्र आया। ट्रंप ने दावा किया कि उनके कैंपेन की जासूसी की गई थी।
"आपके पास इसका क्या सबूत है?" लेस्ली स्टाल ने सीधे शब्दों में पूछा।
ट्रंप ने कहा कि यह सब सबके सामने है और इस पर बहुत सारे सबूत मौजूद हैं। स्टाल अपनी बात पर अड़ी रहीं। उन्होंने साफ कहा कि पत्रकारिता में बिना पुष्टि के बातें नहीं दिखाई जा सकतीं। वे बार-बार ट्रंप से ठोस सबूत मांग रही थीं। यहीं पर ट्रंप का धैर्य जवाब दे गया।
कैमरे के पीछे का वो तनावपूर्ण आधा घंटा
इंटरव्यू लगभग 45 मिनट तक चला। ट्रंप लगातार स्टाल के सवालों के तरीके पर आपत्ति जता रहे थे। उन्हें लग रहा था कि स्टाल उनके साथ पक्षपात कर रही हैं। वे कह रहे थे कि जो सवाल जो बाइडन से पूछे जाते हैं, वे बहुत आसान होते हैं। जबकि उनसे शुरुआत से ही बेहद कड़े और नकारात्मक सवाल पूछे जा रहे हैं।
तभी कैमरे के पीछे मौजूद एक प्रोड्यूसर ने समय की याद दिलाई। पांच मिनट बचे होने की बात सुनते ही ट्रंप ने अपनी टीम की तरफ देखा। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हमारे पास काफी मटेरियल हो चुका है। अब इसे यहीं रोकते हैं।
इसके तुरंत बाद ट्रंप अपनी कुर्सी से उठे और कमरे से बाहर निकल गए। वे इतने नाराज थे कि उन्होंने माइक पेंस के साथ होने वाले जॉइंट शूट में हिस्सा लेने से भी मना कर दिया। वाइट हाउस के स्टाफ और सीबीएस न्यूज की टीम के बीच सन्नाटा पसर गया।
ट्रंप का जवाबी हमला और वीडियो लीक का ड्रामा
ट्रंप सिर्फ इंटरव्यू छोड़कर नहीं भागे। उन्होंने इसे एक राजनीतिक हथियार बनाने का फैसला किया। सीबीएस न्यूज इस इंटरव्यू को रविवार को प्रसारित करने वाला था। पर ट्रंप ने दो दिन पहले ही अपने फेसबुक और ट्विटर अकाउंट पर इंटरव्यू का कच्चा फुटेज खुद ही लीक कर दिया।
उनका तर्क था कि जनता को देखना चाहिए कि मीडिया कितना पक्षपाती है। उन्होंने लेस्ली स्टाल पर मास्क न पहनने का आरोप भी लगाया और वाइट हाउस की एक क्लिप शेयर की। सीबीएस न्यूज ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वाइट हाउस ने अपने वादे को तोड़ा है, लेकिन यह चैनल को निष्पक्ष पत्रकारिता करने से नहीं रोक पाएगा।
इस कदम ने मीडिया जगत को हिलाकर रख दिया। कोई भी राष्ट्रपति पहले इस हद तक मीडिया से नहीं उलझा था। ट्रंप ने अपने समर्थकों को यह दिखाने की कोशिश की कि वे 'फेक न्यूज' के खिलाफ अकेले लड़ रहे हैं।
पत्रकारिता और सत्ता के बीच की लक्ष्मण रेखा
इस पूरी घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए। क्या एक पत्रकार को राष्ट्रपति से इस लहजे में बात करनी चाहिए? या फिर क्या एक राष्ट्रपति को जनता के सामने अपनी बात रखने के लिए सबूतों की कसौटी पर नहीं कसा जाना चाहिए?
जो लोग ट्रंप के समर्थक थे, उन्हें लगा कि लेस्ली स्टाल का रवैया आक्रामक और अपमानजनक था। वहीं दूसरी तरफ, स्वतंत्र पत्रकारों का मानना था कि स्टाल ने सिर्फ अपना काम किया। बिना सबूत के दावों को देश के सामने सच मानकर परोस देना पत्रकारिता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
राजनीति में जब आपके पास तथ्यों की कमी होती है, तो गुस्सा या ध्यान भटकाना सबसे आसान रास्ता बन जाता है। ट्रंप ने इंटरव्यू छोड़कर और बाद में स्टाल पर हमले करके यही करने की कोशिश की थी।
अगर आप आज के दौर में पब्लिक स्पीकिंग, मीडिया हैंडलिंग या राजनीति को समझना चाहते हैं, तो इस इंटरव्यू को एक केस स्टडी की तरह देखना चाहिए। जब आप किसी बड़े मंच पर बिना तैयारी के या सिर्फ दावों के भरोसे जाते हैं, तो एक मजबूत इंटरव्यूअर आपको संकट में डाल सकता है। किसी भी बहस या इंटरव्यू में जाने से पहले अपने दावों के पीछे ठोस आंकड़े और सबूत रखना जरूरी है। गुस्सा कभी भी तथ्यों का विकल्प नहीं हो सकता। अपनी बात को मजबूती से रखने के लिए ठंडे दिमाग और पुख्ता जानकारी की जरूरत होती है, जो उस दिन वाइट हाउस के उस कमरे में गायब थी।